देख हालत मरीज़ की अपनेहर्फ़ समझा अज़ीज़ की अपनेदे तवज्जोह मलाल को मेरेकर वकालत तमीज़ की अपनेकर चुकी है ख़याल बेगानाक़द्र कर अब तू चीज़ की अपने— Sristi Singh