कोई अपना नज़र नहीं आता
जब तलक मेरा घर नहीं आता
ग़म से ज़्यादा शराब पीते हैं
इश्क़ का भी हुनर नहीं आता
दिल अँधेरे में ऐसे डूबा है
कि यहाँ रहगुज़र नहीं आता
— Sristi Singh
जब तलक मेरा घर नहीं आता
ग़म से ज़्यादा शराब पीते हैं
इश्क़ का भी हुनर नहीं आता
दिल अँधेरे में ऐसे डूबा है
कि यहाँ रहगुज़र नहीं आता
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