तू है वो शख़्स, जो मुझ को पुराना याद आता है
तुझे भी क्या कोई पागल दिवाना याद आता है
लिखीं ग़ज़लें थी जो तुझ पर कभी जो याद में तेरी
वो घंटों बैठ कर तुझ को सुनाना याद आता है
कभी वो रूठकर मुझ से न मिलने की क़सम खाकर
तेरा नज़रें झुकाकर फिर उठाना याद आता है
थी काटी ज़िंदगी मैं ने तेरे जिस एक वादे पर
है बाकी आज भी तुझ को निभाना याद आता है
— Shashank Shekhar Pathak















