चाहा मैं ने साथ तुम्हारा बस एक दो मुलाक़ात नहीं
मैं सावन की बारिश हूँ कोई बे-मौसम बरसात नहीं
तुम क्या जानो क्या गुज़री जब तुम ने मुझ को था छोड़ दिया
तुम को तो बस ये लगता था छोड़ दिया कोई बात नहीं
सबका हाल यही होता है इश्क़ में जो हारा होता है
दिन तो कट जाता है लेकिन कटती है तन्हा रात नहीं
— Shashank Shekhar Pathak















