ये जो हम मुस्कुराते फिर रहे हैं
यक़ीं सब को दिलाते फिर रहे हैं
फ़क़त टूटा हुआ दिल ही बचा है
उसे सब से लगाते फिर रहे हैं
उसी की याद में थे जागते सब
उसी को अब सुलाते फिर रहें हैं
हुनर हम को नहीं था शा'इरी का
यही सब को बताते फिर रहें हैं
जिसे आती नहीं हिंदी सही से
ग़ज़ल उर्दू की गाते फिर रहें हैं
— Surya Tiwari















