तड़पता ही नहीं इतना अगर शाइर नहीं होता
तड़पना क्या? मैं ख़ुश रहता अगर शाइर नहीं होता
कभी सुनता नहीं इसको ज़माना ग़ौर से यारों
अहम किरदार क़िस्से का अगर शाइर नहीं होता
मुझे सबकी मोहब्बत ने बनाया एक ऑटोग्राफ़
मैं सिग्नेचर ही रह जाता अगर शाइर नहीं होता
ख़ुदा की रहमतों से मैं मेरी ग़ज़लों का मालिक हूँ
कहीं नौकर बना होता अगर शाइर नहीं होता
मुझे भी घेर लेती फिर किसी दिन मज़हबी बातें
सियासत में चला जाता अगर शाइर नहीं होता
'नवा', 'ग़ाफ़िल', 'चराग़', 'आशू', 'वरुन आनन्द' और 'ताबिश'
'तनोज' इनसे नहीं मिलता अगर शाइर नहीं होता
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