ज़िन्दगी भर फूल ही भिजवाओगे
या किसी दिन ख़ुद भी मिलने आओगे
पहरे-दारों से बचूँगा कब तलक
दोस्त तुम एक दिन मुझे मरवाओगे
ख़ुद को आईने में कम देखा करो
एक दिन सूरज-मुखी बन जाओगे
— Tehzeeb Hafi
या किसी दिन ख़ुद भी मिलने आओगे
पहरे-दारों से बचूँगा कब तलक
दोस्त तुम एक दिन मुझे मरवाओगे
ख़ुद को आईने में कम देखा करो
एक दिन सूरज-मुखी बन जाओगे
Other ghazal from the same pen
Shers of environment shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling