mile usko zara dil todne vaala barabar hai | मिले उसको ज़रा दिल तोड़ने वाला बराबर है

  - RAAHI

मिले उसको ज़रा दिल तोड़ने वाला बराबर है
अकेली वो नहीं दुनिया कि इकलौती सितमगर है

मुकर्रर हो रही है शायरी बस नाम से तेरे
ज़माने को नहीं मालूम कितना दर्द अंदर है

अदब वाले बचे इस शहर में अब कौन है बोलो
यहाँ हर शख़्स के भीतर छिपा अपना समंदर है

ज़रा सी इक झलक पा के फ़क़त शीशे में खिलजी ने
कहा पद्मावती नायाब अलबेली सी सुन्दर है

किसी को याद कर के पन्ने भरता आजकल राही
सुना चर्चा है महफ़िल में बड़ा अच्छा सुखन-वर है

  - RAAHI

Samundar Shayari

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