hamaari yaad se un ki bagaavat tak nahin hoti | हमारी याद से उन की बग़ावत तक नहीं होती

  - RAAHI

हमारी याद से उन की बग़ावत तक नहीं होती
मोहब्बत की है जब से तो शिकायत तक नहीं होती

अगर आते न उस दिन वो लगा कर के अलग काजल
हमारे दिल-नज़र से यूँँ शरारत तक नहीं होती

मेरे कमरे में जानाँ देख सब बिखरा पड़ा है अब
तेरे जाने पे मुझ सेे तो हिफ़ाज़त तक नहीं होती

हमारा दिल किसी लड़की पे अब लगता कहाँ दिलबर
मुहब्बत के जो मारे है मुहब्बत तक नहीं होती

मगर वादे वफ़ा के तुम सभी आशिक़ से करते हो
अगर तुम सा ही होता तो मुसीबत तक नहीं होती

बहुत ज़्यादा तजुर्बा है तुझे आशिक़ बदलने का
अगर मिलते न मुझको तो ये ग़फ़लत तक नहीं होती

बदलते हम अगर तेरी तरह हर दिन नया बिस्तर
बदलते दर्द से राही को दिक़्क़त तक नहीं होती

  - RAAHI

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