हो कर जुदा तुम सेे ग़ज़ल-गोई नहीं होगी कभीहाँ बा'द तेरे दिल में फिर कोई नहीं होगी कभीखु़द को तसल्ली दे रहा है बोल कर 'राही' यहीशायद बिछड़ने बा'द वो सोई नहीं होगी कभी— RAAHI