RAAHI
RAAHI
Ghazal

याद में जो लिखा तेरे, ख़त हो गए

लिखना था तो बहुत, कम लुग़त हो गए

बात क्या है, बताना ज़रा यार तुम
कौन सी बात की अहमियत हो गए

मैं बुरा ही सही पर सही तो रहा
तुम सही होते होते ग़लत हो गए

यार अब दिल नहीं कर रहा कहने का
तुम अलग क्या हुए खै़रियत हो गए

क्या हुआ जो न मिल सकते अब तुम से हम
दूर ही तो हो या सल्तनत हो गए

चाह तो थी बयाँ बात सब करने की,
कौन वापस सुने हम ग़लत हो गए

— RAAHI

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