मेरी क़िस्मत में लिखा होता है
हद से ज़्यादा जो बुरा होता है
अपने दुखड़े मैं सुनाऊँ किस को
सब का दुख मुझ से बड़ा होता है
बे-क़ुसूरो को सज़ा मिलती है
कैसे मानूँ कि ख़ुदा होता है
बच्चियों को भी नहीं छोड़ते हैं
आदमी कितना गिरा होता है
— ABhishek Parashar















