tere aage zamaana kuchh nahin hai | तेरे आगे ज़माना कुछ नहीं है

  - ABhishek Parashar

तेरे आगे ज़माना कुछ नहीं है
मेरी नज़रों में दुनिया कुछ नहीं है

मुझे हर बार धोखा ही मिला है
मगर दिल है समझता कुछ नहीं है

ज़रूरत साथ ले आई है वरना
हमारे बीच रिश्ता कुछ नहीं है

बहुत ता'रीफ़ करता है वो उसकी
मगर वो उसपे लिखता कुछ नहीं है

सभी से 'इश्क़ करता फिर रहा है
मगर वो करता धरता कुछ नहीं है

मेरी वीरान सी इस ज़िंदगी में
उदासी के अलावा कुछ नहीं है

वो भी पैसे कमाते फिर रहे हैं
जो कहते थे कि पैसा कुछ नहीं है

मोहब्बत करने तो तुम जा रहे हो
मियाँ पर इस
में रक्खा कुछ नहीं है

  - ABhishek Parashar

Mayoosi Shayari

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