“सावधान”
ये तुम्हारे हाथों में दिल थमा ही इसीलिए रहा है कि तुम उसे तोड़ दो
भले टूट जाओगी ख़ुद भी तुम
ये गले लगाएगा तुम को और
किसी बम की तरह फटेगा फिर
इसे सिर्फ़ वस्ल नहीं
फ़िराक़ भी चाहिए
कि ये नज़्म कह सके हिज्र पर
ये वो लड़का है
जिसे जौन बनके दिखाना है
इसे शा'इरी से ही नाम अपना कमाना है
इसे तुम नहीं इसे फ़ारिहा कोई चाहिए
इसे शा'इरी के लिए गिला कोई चाहिए
इसे तुम नहीं
इसे मिसरा चाहिए
सावधान
— Ananth Faani















