Ananth Faani

Ananth Faani

@theananth

Ananth Faani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ananth Faani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

इन की रिवायत इन के तरीक़े इन के हैं दस्तूर बाहरस आने वाले अँगूठा काट के दें — Ananth Faani

Ghazal

उतारे उस के चेहरे से जो सारे ही नक़ाबों को रखा करता हूँ दूर ऐसे सवालों और जवाबों को गुलाबों से लबों को तोलना हरगिज़ नहीं जाइज़ मुआ'फ़ी मीर जी तौलेंगे हम लब से गुलाबों को सुना है ये सिमटना फैलना सारा तसलसुल है समझना क्या अलग फिर जुगनुओं से आफ़ताबों को ज़हानत वस्ल उदासी ज़िंदगी ईमाँ सुख़न-कारी शराबी लोग क्या क्या नाम देते हैं शराबों को ग़ज़ल की शाह-रह पे चल पड़ी हैं गाड़ियाँ कितनी मिलेगा ख़ूब धंधा सब किनारे वाले ढाबों को बदन के खेल में तो तय थी अपनी हार 'फ़ानी जी' बनाया इस लिए मैदान हम ने फिर किताबों को — Ananth Faani
बस इतनी सी बात कि उस की बातें अच्छी हैं जाने कितनी बनती बातें इस सेे बिगड़ी हैं सिर्फ़ इस लिए कि थक भी जाता हूँ करते करते काफ़ी बढ़िया बातें होने से रह जाती हैं छक्के पड़ जाते हैं अच्छी ख़ासी गेंदों पे ऐंवई ऐंवई गेंदों पे भी विकटें गिरती हैं अलग अलग चीज़ें हैं दाम और क़ीमत यूँँ समझो क़ीमती चीजें कितनी हैं जो सस्ती बिकती हैं अच्छी हैं कविताएँ आप की हम ने उन सेे कहा वो तो रूठ गए हम से बोले बस अच्छी हैं शहर में ये वहशत पनपी है हम में क्या ही कहें जंगल के वासी भी हम से कम ही जंगली हैं मेरी क्लास के सब बच्चे ग़ज़लें भी कहने लगे मेरी ही रचनाएँ बस अब भी तुकबंदी हैं सुना किसी फ़ानी को महफ़िल में तो लगा मुझे अरे अरे ये ग़ज़लें नज़्में सारी मेरी हैं — Ananth Faani

Nazm

“मंतर” सर्द सी उस सुब्ह का वो मंज़र अब तक याद है कोहरा कैसा छाया था पानी पर अब तक याद है पीछे धुंधली रौशनी बल्बों की आगे कुछ नहीं ऐसे में दरिया से निकला मंतर अब तक याद है डूब जा गहरा है पानी देर मत कर डूब जा कोशिशें तह तक पहुँचने की कर आ जा और उतर तैरना बेकार है उस पार क्या ही पाएगा फ़ाइदा इस मौज का इस लहर का ले डूब जा डूब जा ठंडा है पानी ये घड़ी है डूब जा आग तेरी और कैसे शांत होगी सोच मत हिचकिचाहट चीज़ तेरे ध्यान के लाइक़ नहीं राम तक डूबे हैं पानी में तुझे फिर क्या भरम डूब जा प्यासा है पा- तब तक किनारा आ गया नक़्द देकर ना-ख़ुदा को शुक्रिया कह कर उसे शाल थोड़ी और कसके ओढ़कर मैं चल दिया बात थोड़े पहले की है ये पर अब तक याद है — Ananth Faani