माना कि शक्ल से मैं ज़रा सा मतीन हूँ
लेकिन हॅंसी मज़ाक़ में मैं बेहतरीन हूँ
कुछ वक़्त मुझ पे काम हुआ फिर मैं कट गया
जो फ़िल्म तक पहुँच न सका मैं वो सीन हूँ
मैं आदमी की ज़ात गुमाँ क्यूँ न हो मुझे
क्योंकर भरम न हो कि बस इक मैं ज़हीन हूँ
ख़ुद तक उरूज़ भी मेरा ख़ुद तक ज़वाल भी
या'नी हूँ मैं ही आसमाँ मैं ही ज़मीन हूँ
दिल एक अक़्ल दो वो जो इनको सुने वो तीन
मैं एक शख़्स हूँ ही कहाँ मैं तो तीन हूँ
तौहीन इतनी भी न कर उन की पसंद की
फ़ानी क़ुबूल कर ले कि मैं भी हसीन हूँ
— Ananth Faani















