माहौल कुछ नया सा बनाओ रदीफ़ में
कोई तो इन्क़िलाब भी लाओ रदीफ़ में
हों क़ैद जो या पंख हो जिन के कटे हुए
ग़ज़लों में लाओ उन को उड़ाओ रदीफ़ में
घूमा किए हो ख़ूब क़वाफ़ी में आके तुम
मानूँ मैं तब तुम्हें कि जब आओ रदीफ़ में
पानी पे इतने शे'र हुए आग पे नहीं
ऐसा करो अब आग लगाओ रदीफ़ में
मग़रूर है जो अपने न पीने पे उस को लाओ
मिसरों के जाम भरके पिलाओ रदीफ़ में
काफ़ी अजीब फ़ैसले तुम ने लिए अनन्त
इन फ़ैसलों के बोझ उठाओ रदीफ़ में
— Ananth Faani















