hai aaina jo tira dil to meraa patthar hai | है आइना जो तिरा दिल तो मेरा पत्थर है

  - Haider Khan

है आइना जो तिरा दिल तो मेरा पत्थर है
ये मिल गए तो तिरा टूटना मुक़द्दर है

सँभल सँभल के क़दम इस में आप रखिएगा
ज़मीं है 'इश्क़ कभी तो कभी समंदर है

तुम्हारा हाथ मिरे हाथ में तो है लेकिन
है एक फ़ासला जो अब भी अपने अंदर है

गए जो तुम तो गुज़रते नहीं हैं अब मौसम
अभी भी घर में मिरे बीस का सितंबर है

वो ख़्वाब देख नहीं पाते जो ये कहते हैं
कि पैर उतने ही फैलाओ जितनी चादर है

वो शख़्स देखना सत्ता में आ ही जाएगा
ज़मीं के नीचे है उतना वो जितना ऊपर है

सड़क किनारे कैलेंडर नहीं है उसके पास
उसे तो सर्दी बताती है ये दिसंबर है

है आसमाँ भी बहुत ख़ूब हाँ मगर जब तक
ज़मीं पे माँ है ज़मीं आसमाँ से बेहतर है

  - Haider Khan

Garmi Shayari

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