is raat ki taarikee par kuchh to asar aa.e | इस रात की तारीकी पर कुछ तो असर आए

  - Haider Khan

इस रात की तारीकी पर कुछ तो असर आए
चेहरे से हटा जुल्फ़ें के चाँद नज़र आए

ख़त आपको लिख लिख कर उक्ता से गए हम भी
अब आप की जानिब से कोई तो ख़बर आए

मंज़िल न ठिकाना हो और साथ तुम्हरा हो
ए काश के किस्मत में एसा भी सफ़र आए।

दुनिया के खराबे में ख़्वाबों को जला कर के
जब कुछ न हुआ हासिल हम लौट के घर आए

मिट्टी की महक से ही पहचान मैं लेता हूँ
जब ट्रेन से लौटूँ और अपना ये शहर आए

उस शख़्स के लहजे में तासीर है इतनी के
बोले तो समंदर से गौहर भी उभर आए

  - Haider Khan

Khushboo Shayari

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