मेरे हम साए को मुझ सेे जी चुराना आ गया

जब मैं उस के सामने जैसा था वैसा आ गया

मुत्मइन था पूरे घर में रौशनी भर दूँगा आज
पहला दीया ही जला और ख़ुद का साया आ गया

फिर बताऊँगा सभी को सर झुकाने का हुनर
पहले ख़ुद हैरान हो लूँ ये मुझे क्या आ गया

छूने की ज़िद में उसे महसूस कर पाया नहीं
प्यास ही ले कर गया था और प्यासा आ गया

क्या अँधेरा मिट गया सबने फ़क़त पूछा यही
कब किसी को थी तसल्ली दीप ज़िंदा आ गया

— ADITYA TIWARI

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