
हमारा दुख नहीं है ये ज़माने भर का दुख है
सभी को अपने दुख को बस छुपाने भर का दुख है
ये दिल-विल टूटना मिलना बिछड़ना दुख है कोई
अमा ये दुख तो केवल गुनगुनाने भर का दुख है
— Purushottam Tripathi
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