तुम भी मुझ को भुला नहीं पाई
ठीक से मुस्करा नहीं पाई
हँसते हँसते छलक गए अरमाँ
आँसुओं को छुपा नहीं पाई
आज भी ठीक से लिपस्टिक को
होंठों पर तुम लगा नहीं पाई
कोई चाहेगा इस क़दर तुम को
इश्क़ में दिल छुपा नहीं पाई
आँख में थे कई हसीं सपने
डूबनें से बचा नहीं पाई
— Umesh Maurya















