tumhaari yaad khushboo hai tumhaari yaad titli hai | तुम्हारी याद ख़ुश्बू है तुम्हारी याद तितली है

  - Umesh Maurya

तुम्हारी याद ख़ुश्बू है तुम्हारी याद तितली है
तुम्हारी याद के मौसम में फैली ताज़गी सी है

जहाँ तक देख सकता हूँ तुम्हें उस मोड़ तक देखूँ
लगे जैसे यही अंतिम सफ़र अब आख़िरी ही है

बहुत से लोग हैं तस्वीर में अच्छे, बहुत अच्छे
तेरे चेहरे पे ही मेरी नज़र हरदम ठहरती है

सहे चुपचाप हम कितने सितम तेरे लिए जानाँ
अभी जब मुस्कराता हूँ तेरी चाहत झलकती है

कहाँ तुम देख पाये हो किसी मज़दूर की क़िस्मत
पसीने से सनी रोटी किनारों पर जली भी है

सियासत के नतीजे रोज़ अख़बारों के पन्ने पर
गरम बाज़ार है नफ़रत भरी जलती अँगीठी है

तुम्हारी ओर से उम्मीद सारी छोड़ दी मैनें
मेरा किरदार इतना था तेरी पूरी कहानी है

  - Umesh Maurya

Zulm Shayari

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