धी
में धी
में कहता क्या है शोर मचा
ये हाकिम ऊँचा सुनता है शोर मचा
गूँगों में रह कर गूंगा हो जाएगा
तू तो शोर मचा सकता है शोर मचा
ख़ामोशी बद- शगुनी ले कर आती है
शोर बड़ा अच्छा होता है शोर मचा
बोल नहीं सकते हैं जो सब मुर्दा हैं
तू बतला दे तू ज़िंदा है शोर मचा
ज़ेहन तो बोलेगा चुप रहना बेहतर है
तू वो कर जो दिल कहता है शोर मचा
दस्तक से जब हक़ का दरवाज़ा न खुले
शोर मचाने से खुलता है शोर मचा
— Varun Anand















