नज़दीक हो कर दूर लगते हैं सभी
रिश्ते बड़े मजबूर लगते हैं सभी
चारों दिशा फैला गगन देखो ज़रा
तारे ज़रा मग़रूर लगते हैं सभी
हर काम दिल से जब करो अच्छा लगे
अब शहरी तो मजदूर लगते हैं सभी
ये दौर अच्छा भी नहीं है आज का
यूँ दर्द भी मशहूर लगते हैं सभी
— Vinod Ganeshpure














