ये भँवर है आप की दुनिया नहीं
इस पते पर अब कोई रहता नहीं
एक ही ग़म एक ही तकलीफ है
जो कभी मेरा था,अब मेरा नहीं
जब ज़रूरत थी तुम्हारी, तुम न थे
साथ रहते तुम तो कुछ खोता नहीं
मैं मुहब्बत फिर से कर तो लूँ मगर
ये तमाशा हम से अब होगा नहीं
एक ग़म दिल में दबाए जी रहा
एक चेहरा है जिसे भूला नहीं
— Ved prakash Pandey















