देखो क्या दीवाना है
अपना आप निशाना है
यूँ तो साथ ज़माना है
पर ख़ुद से बेगाना है
उस को क्या समझाओगे
वो ख़ुद एक सियाना है
वो इतने दिन बा'द मिला
मुश्किल से पहचाना है
तुम से घर कहलाता था
अब तो सिर्फ़ घराना है
— Vigyan Vrat
अपना आप निशाना है
यूँ तो साथ ज़माना है
पर ख़ुद से बेगाना है
उस को क्या समझाओगे
वो ख़ुद एक सियाना है
वो इतने दिन बा'द मिला
मुश्किल से पहचाना है
तुम से घर कहलाता था
अब तो सिर्फ़ घराना है
Other ghazal from the same pen
Shers of relationship shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling