कोई अच्छा बहाना चाहता है
मुझे नीचा दिखाना चाहता है
मुझे आभास होता है कि जैसे
तू मुझ से जी छुड़ाना चाहता है
नहीं मुमकिन है ये लेकिन किनारा
नदी के साथ जाना चाहता है
बजाते थे जिसे मोहन मेरा मन
वही बंसी बजाना चाहता है
उसे मालूम है मैं साथ हूँ पर
मुझे वो आजमाना चाहता है
— Vikas Sahaj















