अपनी आदत से मजबूर हूँ मैं
इस लिए तुम से भी दूर हूँ मैं
आज बदनाम कर दो मुझे तुम
कुछ ज़ियादा ही मशहूर हूँ मैं
रात को मुझ से वो कह गया है
ग़ौर से देखना नूर हूँ मैं
आज अंदर मिरे मैं नहीं हूँ
अब लगे है कि भरपूर हूँ मैं
— Vishesh asthana
इस लिए तुम से भी दूर हूँ मैं
आज बदनाम कर दो मुझे तुम
कुछ ज़ियादा ही मशहूर हूँ मैं
रात को मुझ से वो कह गया है
ग़ौर से देखना नूर हूँ मैं
आज अंदर मिरे मैं नहीं हूँ
अब लगे है कि भरपूर हूँ मैं
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling