यही कहानी थी यही फ़साना था
थी इक गली जहाँ मिरा ठिकाना था
मैं हट गया उधर से ऐन मौक़े' पर
मिरे तरफ़ ही उस का वो निशाना था
मैं जाते देखता ही रह गया उसे
कि भूल मैं गया उसे बुलाना था
नई शिकायतें सुनी गईं मगर
मुझे पुराने ज़ख़्म को दिखाना था
वो बात कर रही थी पर मुझे लगा
कहीं सुना सुना सा इक तराना था
किसी ने हाल तक नहीं पता किया
बड़ा ख़राब सा लगा ज़माना था
यहाँ से लोग उठ के चल पड़े कहाँ
अभी मुझे भी अपना दुख सुनाना था
— Vishesh asthana















