mohabbat ke gharo ke kacche-pan ko ye kahaan samjhen | मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें

  - Waseem Barelvi

मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें
इन आँखों को तो बस आता है बरसातें बड़ी करना

  - Waseem Barelvi

Valentine Shayari

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    तो आज ऐसी तिरी सल्तनत नहीं होती

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    तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता

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    उस को भी मुझे छोड़ के जाना नहीं आता

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    आँसू को मिरी आँख में आना नहीं आता

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    तुम को तो कोई घर भी जलाना नहीं आता
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