मैं हूँ मसरूफ़-ए-जुस्तुजू-ए-क़ज़ा
अब मुझे भी है आरज़ू-ए-क़ज़ा
ऐ मेरे दोस्तों ख़ुदा हाफ़िज़
मुझ को जाना पड़ेगा सू-ए-क़ज़ा
वक़्त-ए-आख़िर है मिलने आ जाओ
मुझ को आने लगी है बू-ए-क़ज़ा
ख़ुद को थोड़ा सँवार लो ऐ अमान
तुम ने होना है रूबरू-ए-क़ज़ा
— Amaan Haider
अब मुझे भी है आरज़ू-ए-क़ज़ा
ऐ मेरे दोस्तों ख़ुदा हाफ़िज़
मुझ को जाना पड़ेगा सू-ए-क़ज़ा
वक़्त-ए-आख़िर है मिलने आ जाओ
मुझ को आने लगी है बू-ए-क़ज़ा
ख़ुद को थोड़ा सँवार लो ऐ अमान
तुम ने होना है रूबरू-ए-क़ज़ा
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