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इश्क़ के रंग में ऐ मेरे यार रंग
आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग
आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग
हो गुलाबी या हो लाल पीला हरा
आ लगा दूँ तुझे भी मैं दो चार रंग
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बैठा हूँ अभी सामने और सोच रहा हूँ
इज़हार पे मेरे भला क्या मेरा बनेगा
इज़हार पे मेरे भला क्या मेरा बनेगा
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया
शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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इक और इश्क़ की नहीं फ़ुर्सत मुझे सनम
और हो भी अब अगर तो मेरा मन नहीं बचा
और हो भी अब अगर तो मेरा मन नहीं बचा
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रूठ के मुझ से घर के द्वारे बैठी है
गाल फुला कर प्यारे प्यारे, बैठी है
गाल फुला कर प्यारे प्यारे, बैठी है
अपने कमरे में ख़ामोश खड़े हैं हम
और तन्हाई बाल सँवारे बैठी है
छूट रहा है उम्मीदों का दामन अब
ना उम्मीदी पाँव पसारे बैठी है
सोचा था बाहर खाने पर जाएँगे
पर वो मूंग की दाल बघारे बैठी है
चुप बैठे हैं रेल की खिड़की से लग कर
और उदासी साथ हमारे बैठी है
बैठे हैं चुप-चाप अकेले हम इस पार
इक दुनिया उस पार किनारे बैठी है
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