Ahtisham Aslam

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Ahtisham Aslam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ahtisham Aslam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
हम थे कश्ती तो वो पतवार हुआ करते थे
इश्क़ के दरिया से यूँ पार हुआ करते थे

सामना होते ही चेहरे को छुपा लेते हैं
याद करते हैं कभी यार हुआ करते थे

उनके चेहरे से अयाँ होते थे रफ़्ता-रफ़्ता
उनकी आँखों में जो असरार हुआ करते थे

वक़्त बदला तो क़लम थाम ली हमने वर्ना
कल तलक हाथों में तलवार हुआ करते थे

आज वो लोग हैं रहबर की सफ़ों में शामिल
कल जो ज़ालिम के तरफ़-दार हुआ करते थे

वक़्त बदला तो नसीहत भी नहीं करते हैं
मेरे अहबाब जो ग़म-ख़्वार हुआ करते थे

आज क़ीमत सर-ए-बाज़ार लगी है उनकी
कल तलक ख़ुद जो ख़रीदार हुआ करते थे

दर-ब-दर फिरते हैं छप्पर भी मयस्सर ही नहीं
जिनके कल शहर में दरबार हुआ करते थे

अब तो ये हक़ भी नहीं तुझसे दुआओं का कहें
कल तेरे नाम पे बीमार हुआ करते थे

हाल-ए-दिल पढ़ते हुए अक्स झलकता था वहाँ
ख़त नहीं होते थे अख़बार हुआ करते थे

वो भी जा पहुँचे हैं अब अपने बुढ़ापे की तरफ़
पेड़ आँगन के जो फलदार हुआ करते थे

इस बहाने से अयादत के लिए आओगे
बस यही सोच के बीमार हुआ करते थे

इश्क़ में हो गए तेरे यूँ ही पागल वरना
वैसे असलम भी समझदार हुआ करते थे
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Ahtisham Aslam
राह-ए-अम्न में अक्सर खाइयाँ बनाते हैं
प्यार करने वालों में दूरियाँ बनाते हैं

आओ हम गले मिलकर मात दें सियासत को
जो भी फ़ासले अपने दरमियाँ बनाते हैं

ज़ालिमों भला कैसे तुम हमें उजाड़ोगे
हम तो वो हैं जो दिल में बस्तियाँ बनाते हैं

हक़ बयान करने से हम कभी नहीं डरते
ग़ौर से ये सुन लें जो बेड़ियाँ बनाते हैं

पुर-सुकून होते हैं ख़ूॅं से तर-ब-तर करके
हमको क़त्ल कर के वो सुर्ख़ियाँ बनाते हैं

उनको ये ख़बर कर दो सच का पासबाँ है रब
जो चराग़ की ख़ातिर आँधियाँ बनाते हैं

दूर रहते देखा है इल्म उनके बच्चों से
मुद्दतों से वालिद जो तख़्तियाँ बनाते हैं

फ़ज़्ल-ए-रब से ही उनका रास्ता नहीं रुकता
दूसरों की ख़ातिर जो सीढ़ियाँ बनाते हैं
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