"पहला इश्क़"
पता है इश्क़ कहाँ हुआ था हमें,
शायद ख़ुद नहीं पता ,
हाँ एक बार देखा था उस को,
अपनी उँगलियों को कानों के पीछे ले जाते हुए,
उन बालियों की चमक पर,
मन जैसे अटक सा गया था
खिलखिलाती हंसती वो मानो,
वादियों की सर्द हवाएँ ,
और फिर मुस्कुराते हुए देखने पर उस का शर्माना,
जैसे कोहरे की गर्म चाय ,
वो पहली मुलाक़ात गुनगुनी धूप
और उस का पहला स्पर्श,
हाँ वो कैसे भूल सकता हूँ मैं
मचलती आँखें जो ग़ुस्से का इशारा करती थी,
हाँ बस वही कहीं पर अटक गया था मैं
शायद ये सब कुछ ख़ास ना लग रहा हो,
इसलिए नहीं पता इश्क़ कहाँ हुआ था हमें
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