समझ आया मोहब्बत में उदासी है
    तुम्हारी क्यों इबादत में उदासी है

    हमारे ही क़बीले से ये निकली है
    हमारी ही रिवायत में उदासी है

    तुझे अच्छा नहीं लगता ये माना चल
    तेरी फिर क्यों शिकायत में उदासी है

    अलग खाते अलग जीते अलग हो अब
    अभी फिर क्यों तबीअत में उदासी है

    नज़र उसकी में रहना भी है डरना भी
    तो क्या उसकी इजाज़त में उदासी है
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    Amanpreet singh
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    तुम्हारे बाद सबने चाल मतलब की चली यारा
    तुम्हारे बाद तुम जैसा मुझे कोई नहीं समझा
    Amanpreet singh
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    मुझे नाराज़ होने का यूँ हक़ तो अब नहीं शायद
    उसे मुझसे कहीं प्यारी अना अपनी ही है यारों
    Amanpreet singh
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    करो जब बेवफ़ाई तो न उसपर तुम
    ज़रा सा मुस्कुरा दो और काफ़ी है
    Amanpreet singh
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    उसे मुझसे शिकायत एक ये भी थी
    मुझे उससे मोहब्बत ही हुई थी क्यों
    Amanpreet singh
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    बाल बाँध कर वो दो लट निकाल लेती है
    जान वान वो ऐसे भी निकाल लेती है
    Amanpreet singh
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    वो मुझे भूल सा गया था तब
    बात ये भूल सा गया हूँ मैं
    Amanpreet singh
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    तुझे तेरी मोहब्बत की कसम है अब
    मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को लेकर
    Amanpreet singh
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    मुझे अब फिर बुरी लगने लगी बातें
    मुझे फिर इश्क़ से नफ़रत हुई होगी
    Amanpreet singh
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    तुम्हें ये सब समझने में अभी थोड़ा समय तो है
    किसी ने ज़िंदगी कैसे दुखी हो कर निकाली थी
    Amanpreet singh
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