मौत के पास कर रही भी है
और वही मेरी ज़िंदगी भी है
उसके होंठों पे मुस्कुराहट है
उसकी आँखों में इक नमी भी है
उसके दिल में बहुत सी बातें हैं
और होंठों पे ख़ामुशी भी है
उसकी आँखों के सामने हो तो
मेरी तस्वीर बोलती भी है
पहले रख कर के भूलती है मुझे
बाद में मुझको ढूँढती भी है
इस जहाँ के घने अँधेरे में
उसके होने से रौशनी भी है
शर्त ये भी कि ज़िन्दा रहना है
हिज्र की रात काटनी भी है
सोचता हूँ कि अब भुला दूँ उसे
मेरी रग रग में वो बसी भी हैं
दर्द-ए-दिल की अहम दवाओं में
इक दवाई ये शा'इरी भी है
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