Anand Sharma

Anand Sharma

@kahanikaaranand

Anand Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anand Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

7

Content

8

Likes

16

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Ghazal

अब तक गुज़ारी कैसे शब-ए-इंतिज़ार में मुश्किल है कुछ बताना अभी इस ग़ुबार में दो चार हम भी कह दें इजाज़त मिले अगर जो भी गिले हैं बाक़ी दिल-ए-दाग़दार में मरने की फ़िक्र में जो लड़े ही नहीं कभी उन की भी क़ब्रें हम को मिली हैं दयार में साक़ी ने हद से बढ़ के निभा दी है दोस्ती कुछ जाम रख दिए हैं हमारी मज़ार में बाज़ार में अलग है तवाइफ़ की आरज़ू जो घर में है बताई है घर के क़रार में राह-ए-सुख़न में कहना ज़रा और बात है मरता है कौन वर्ना किसी के भी प्यार में मिटता नहीं वुजूद क़यामत के बा'द भी कितने ही मिट गए हैं इसी ए'तिबार में — Anand Sharma
फ़ासले दिल के मिटाने में ज़माने लग गए बे-वजह फिर मुस्कुराने में ज़माने लग गए हाल जो देखा ज़माने में हक़ीक़त का बुरा ख़्वाब आँखों को दिखाने में ज़माने लग गए उम्र भर दीवानगी शोहरत-परस्ती के लिए चार काँधे भी जुटाने में ज़माने लग गए साहिब-ए-ग़ैरत को ज़िद पैसा कमाने की लगी पैसा ग़ैरत से कमाने में ज़माने लग गए क़तरे क़तरे में मज़ा लो जाम की ये कैफ़ियत पीने वालों को सिखाने में ज़माने लग गए था नहीं आसाँ मुकद्दर का सिकंदर बनना भी इन लकीरों को बनाने में ज़माने लग गए इश्क़ की बरसात में जो भीगते थे रात दिन उन लिबासों को सुखाने में ज़माने लग गए — Anand Sharma
कैसे कह दूँ कि मोहब्बत में ख़सारा न हुआ डूबते को किसी तिनके का सहारा न हुआ पेश आते हैं वो अब मुझ से रक़ीबों की तरह एक पल जिन का बिना मेरे गुज़ारा न हुआ जैसे महफ़िल में वो रिंदाँ से गले लग के मिले शौक़ ये उन का मेरे दिल को गवारा न हुआ मुंतज़िर कौन हो हम जैसे ग़रीबों का भला महफ़िल-ए-यार में जब कोई हमारा न हुआ वो अभी इश्क़ के अंजाम से वाक़िफ़ ही नहीं इश्क़ में फ़र्क कहाँ गर वो हमारा न हुआ अब रुलाते हैं मोहब्बत में जो रोते थे कभी दिल दुखाने का कभी ऐसा नज़ारा न हुआ याद आते थे वो हर रोज़ दु'आओं में हमें इश्क़ फिर वैसा कभी हम को दुबारा न हुआ — Anand Sharma