हम ऐसे लोग नाउम्मीदी में दरिया से हारे हैं
वगरना देख चारों ओर दरिया के किनारे हैं
वो पत्थर मारता तो दुश्मनों में गिन लिया जाता
अब उस का क्या कि जिसने लोग बस फूलों से मारे हैं
किसी ने खोलकर पिंजरा उड़ाया था हमें इक दिन
बस उसके बा'द से बे-घर हैं हम और बे-सहारे हैं
मेरा हँसना ,मेरा रोना, मेरे होंठों की ख़ामोशी
ये सारे चेहरे मैं ने एक चेहरे से उतारे हैं
तेरा पल्लू तो मुझ सेे बा'द में रौशन हुआ लड़की,
कि तुझ सेे पहले हम दो और आँखों के सितारे हैं
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