सपना जैसा भी हो पर सपना सच्चा लगता है
सुंदर महफ़िल हो तो हर कोई अपना लगता है
हम को मुद्दत हुई किसी की तस्वीर को निहारे
तस्वीर देखता हूँ तो सब कुछ अच्छा लगता है
ये टूटी छत गंदे सोफे और वो सूखा चावल
जैसा भी हो लेकिन अपना घर अपना लगता है
एक खिलाड़ी से मत पूछो तुम इश्क़ की कहानी
ये चौराहे का इश्क़ सामने बच्चा लगता है
— Ganesh gorakhpuri















