साथ हो तुम कि हम सराब में हैं
ख़्वाब से उठ गए कि ख़्वाब में हैं
पूछ लीजे कभी पसंद मेरी
आप ही आप बस जवाब में हैं
उतने ही दिन बचे हैं मेरे पास
जितने पन्ने तेरी किताब में हैं
आप की ज़ुल्फ़ आँख लब चेहरा
आप जानाँ मेरी निसाब में हैं
शक्ल तो ख़ैर शक्ल है यामिर
उस के अल्फ़ाज़ तक हिजाब में हैं
— Yamir Ahsan















