ख़ुद पे इल्ज़ाम क्यूँँ धरो बाबा
ज़िंदगी मौत है मरो बाबा
रेत ख़्वाबों की हो कि दर्द के फूल
अपनी झोली में कुछ भरो बाबा
ख़ौफ़ की धुँद घेर लेगी तुम्हें
क्या ज़रूरी है तुम डरो बाबा
जंग जब उन से लाज़मी ठहरे
उन से फिर जंग ही करो बाबा
— Yaqoob Rahi
ज़िंदगी मौत है मरो बाबा
रेत ख़्वाबों की हो कि दर्द के फूल
अपनी झोली में कुछ भरो बाबा
ख़ौफ़ की धुँद घेर लेगी तुम्हें
क्या ज़रूरी है तुम डरो बाबा
जंग जब उन से लाज़मी ठहरे
उन से फिर जंग ही करो बाबा
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