तुझ सेे बिछडूँगा तो पागल नहीं होने वालाहाँ मगर सच है मुकम्मल नहीं होने वालाकोई नुक़सान नहीं होगा उसे पाने मेंवो खरा सोना है पीतल नहीं होने वाला— Zeeshan kaavish