वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकताजो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकतातेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करेकुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता— Zeeshan kaavish