याद उसने मुझे किया होगा
ग़ैर ने उस को जब छुआ होगा
आज तस्वीर देख ली उस की
आज फिर मेरा रतजगा होगा
इश्क़ दोबारा कर रहा हूँ मैं
फिर नया कोई हादसा होगा
बच के रहना हराम कामों से
रब तो सब कुछ ही देखता होगा
गुफ़्तगू की जो तुम से चाहत है
मुझ को ख़तरों से खेलना होगा
वो जो बैठे हैं मेरी महफ़िल में
इश्क़ उन को भी तो हुआ होगा
लाख छुप ले तू बे-वफ़ा लेकिन
हश्र के दिन तो सामना होगा
तेरी डोली जहाँ पे रक्खी है
तेरे 'आशिक़ का मक़बरा होगा
इश्क़ ही देर से हुआ मुझ को
उस की क़िस्मत वो लिख चुका होगा
मुझ को 'ए'जाज़' ये न था मालूम
मेरा हमदम भी बे-वफ़ा होगा
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