मेरे दफ़्तर आ कर उस ने कितना शोर मचाया था

कल ही मैं ने जिस को इतनी मुश्किल से समझाया था

करते थे क्या क्या ता'रीफ़े सब के सब उस के बारे में
किनकी बातों में आ कर मैं उस से मिलने आया था

रस्ते में एक हॉस्टल है हॉस्टल क्या है जन्नत है
पागल करने की ख़ातिर किस ने इस को बनवाया था

दो आँखें कैसे कैसे मंज़र हम को दिखलाती है
उस के घर से कल एक पागल पागल होकर आया था

बड़ी बड़ी डींगे भरते थे आ कर सब मेरे घर पर
किनके चक्कर में पड़ कर सरकारों से टकराया था

— अनुराग दरवेश

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