is | इस

  - ATUL SINGH

इस
में सारा दिल है मेरा और तेरा कुछ नहीं
यानी सब नुक़सान मेरा तेरा ज़ाया' कुछ नहीं

उसके दिल में तो न जाने कैसे कैसे लोग हैं
मेरे दिल में उसकी चाहत के अलावा कुछ नहीं

क्या ग़ज़ब है जिस सेे मिलने में चला जाएगा सब
उस परी को देखने का है किराया कुछ नहीं

तुम जिसे बादल समझते हो वो बादल है कहाँ
वो धुआँ है सिगरेटों का और ज़्यादा कुछ नहीं

बाल अच्छे शक्ल अच्छी उस
में सब कुछ ही सही
मुझ
में तो सब कुछ बुरा है और अच्छा कुछ नहीं

जुर्म था उसने किया लेकिन सज़ा मुझको मिली
उसकी है ये सब अदालत मेरा कहना कुछ नहीं

  - ATUL SINGH

Crime Shayari

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