इस

में सारा दिल है मेरा और तेरा कुछ नहीं
या'नी सब नुक़सान मेरा तेरा ज़ाया' कुछ नहीं

उस के दिल में तो न जाने कैसे कैसे लोग हैं
मेरे दिल में उस की चाहत के अलावा कुछ नहीं

क्या ग़ज़ब है जिस से मिलने में चला जाएगा सब
उस परी को देखने का है किराया कुछ नहीं

तुम जिसे बादल समझते हो वो बादल है कहाँ
वो धुआँ है सिगरेटों का और ज़्यादा कुछ नहीं

बाल अच्छे शक्ल अच्छी उस
में सब कुछ ही सही
मुझ
में तो सब कुछ बुरा है और अच्छा कुछ नहीं

जुर्म था उस ने किया लेकिन सज़ा मुझ को मिली
उस की है ये सब अदालत मेरा कहना कुछ नहीं

— ATUL SINGH

More by ATUL SINGH

Other ghazal from the same pen

See all from ATUL SINGH →

Aarzoo Shayari

Shers of aarzoo.

All Aarzoo Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling