आतिशीं नज़रों से क्यूँँ देख डराओ उस को
बे-वफ़ा कह के न इल्ज़ाम लगाओ उस को
उस ने छोड़ा है जो कुछ तो कमी मुझ
में होगी
अपनी नफ़रत मेरे यारों न दिखाओ उस को
वो जहाँ भी हो ख़ुदा उस को सलामत रखना
जो मेरा हाल है वो हाल न लाओ उस को
मीर वो भूले हैं हम नाम न लेंगे लेकिन
ख़ाक मत डालो न ही आग लगाओ उस को
इतना दिलकश भी सुख़न-वर नहीं हैं यारों अतुल
दूर से देखिए दिल से न लगाओ उस को
— ATUL SINGH















