फिर से गिर जाएँ ऐसा हाल नहीं
इश्क़ में अब तेरे कमाल नहीं
मैं ने देखा था तुझ को ख़्वाबों में
अब हक़ीक़त का भी ख़याल नहीं
मुद्दतों बा'द वो मिला इक दिन
था बिछड़ने का भी मलाल नहीं
दे रहे हैं वो सब जवाब मुझे
जो समझते मेरा सवाल नहीं
उस की मेहँदी में नाम तो है मेरा
हाँ मगर उस का रंग लाल नहीं
ग़म को मेरे तू कैसे समझेगा
तू ने देखा मेरा विसाल नहीं
— ATUL SINGH















