मिले पकवान बे लज़्ज़त है ऊँची भी दुकानों में
निकम्में निकले बच्चे भी कई अच्छे घरानों में
दो दिन वाली मुहब्बत में करें हद पार सारी जो
वही इनको ले जाए मौत की गहरी खदानों में
न पहले सा है अब कुछ फ़र्क़ कथनी और करनी का
रहा आभा न कोई वज़्न लोगों की ज़बानों में
— Abha sethi















